उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sone chandi ke tar silte hain

सोने चाँदी के तार सिलते हैं

سونے چاندی کے تار سلتے ہیں

शायर: Lucky farooqi Hasrat7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सोने चाँदी के तार सिलते हैं
उन के जूते सुनार सिलते हैं

जुर्म के तार-तार दामन को
मुंसिफ़-ए-बा-वक़ार सिलते हैं

अपने मेहमान के लिए ग़ुंचे
तेरी ख़ुशबू से हार सिलते हैं

शहर-ए-ग़ुर्बत के नामवर दर्ज़ी
मेरे कपड़े उधार सिलते हैं

मेरे दुश्मन की आहनी पोशाक
मेरे देरीना यार सिलते हैं

घूस की सूई से कई अफ़सर
मर्सिडीज़ और थार सिलते हैं

फ़िक्र की ज़ुल-फ़िक़ार से 'हसरत'
हम ग़ज़ल का वक़ार सिलते हैं