उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sochte hain to kar guzarte hain

सोचते हैं तो कर गुज़रते हैं

سوچتے ہیں تو کر گزرتے ہیں

शायर: Parveen Fana Syed6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सोचते हैं तो कर गुज़रते हैं
हम तो मंजधार में उतरते हैं

मौत से खेलते हैं हम लेकिन
ग़ैर की बंदगी से डरते हैं

जान अपनी तो है हमें भी अज़ीज़
फिर भी शो'लों पे रक़्स करते हैं

दिल-फ़िगारों से पूछ कर देखो
कितनी सदियों में घाव भरते हैं

जिन को है इंदिमाल-ए-ज़ख़्म अज़ीज़
आमद-ए-फ़स्ल-ए-गुल से डरते हैं

छुप के रोते हैं सब की नज़रों से
जो गिला है वो ख़ुद से करते हैं