उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sochta hun main ki socha jae kya

सोचता हूँ मैं कि सोचा जाए क्या

سوچتا ہوں میں کہ سوچا جائے کیا

शायर: Chandrabhan Khayal7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सोचता हूँ मैं कि सोचा जाए क्या
क्या न देखे और देखा जाए क्या

रौशनी होती तो कोई बात थी
इस अंधेरे घर में ढूँढा जाए क्या

धुंद के उस पार कुछ हलचल तो है
कोई समझाए कि समझा जाए क्या

ख़ौफ़ और वहशत के इस बाज़ार में
क्या ख़रीदें और बेचा जाए क्या

कुछ नतीजा ही नज़र आता नहीं
मसअलों से अब न उलझा जाए क्या

भीड़ के क़दमों तले रौंदा गया
अब उसे मुर्दा ही माना जाए क्या

साल का ये आख़िरी दिन है 'ख़याल'
याद इसे रख लें कि भूला जाए क्या