उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ghaDi-bhar KHalwaton ko aanch de kar bujh gaya suraj

घड़ी-भर ख़ल्वतों को आँच दे कर बुझ गया सूरज

گھڑی بھر خلوتوں کو آنچ دے کر بجھ گیا سورج

शायर: Chandrabhan Khayal7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

घड़ी-भर ख़ल्वतों को आँच दे कर बुझ गया सूरज
किसी के दर्द की लय पर कहाँ तक नाचता सूरज

निगाहों में नए अंदाज़ से फिर रौशनी होगी
जब उग आएगा ज़ेहनों में हमारे इक नया सूरज

ज़मीं का कर्ब औज-ए-आसमाँ पर भी झलक उट्ठा
नशेब-ए-कोह पर जुरअत से जब जब आ मिला सूरज

हमारे घर के आँगन में सितारे बुझ गए लाखों
हमारी ख़्वाब गाहों में न चमका सुब्ह का सूरज

शबिस्ताँ-दर-शबिस्ताँ ज़ुल्मतों की एक यूरिश है
हर इक दामन से लिपटा है लरज़ता हाँफता सूरज

हमारे बाम-ए-दर से आज भी लिपटी है तारीकी
हमारे आसमानों में बताओ कब उगा सूरज

सुना दी दास्ताँ अपनी जो हम ने बे-ज़बाँ हो कर
मिसाल-ए-क़तरा शबनम बिखर कर रो पड़ा सूरज