उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aa raha hai shabab aane do

आ रहा है शबाब आने दो

آ رہا ہے شباب آنے دو

शायर: Chandrabhan Khayal7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आ रहा है शबाब आने दो
अब तो ये इंक़लाब आने दो

वो क़यामत की बात करते हैं
फिर तो होगा हिसाब आने दो

तोड़ दूँगा तिलिस्म उस का भी
मेरे ख़त का जवाब आने दो

पी चुके हैं दवा-ए-दर्द बहुत
दोस्तो अब शराब आने दो

होंगे आज़ाद दाम-ए-हस्ती से
ये ख़ुशी भी जनाब आने दो

कौन डरता है उस के आने से
आए ले कर 'अज़ाब आने दो

आज की फ़िक्र हो न कल का 'ख़याल'
एक ऐसी भी ख़्वाब आने दो