उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ho gai nangi ye duniya mere aage

हो गई नंगी ये दुनिया मेरे आगे

ہو گئی ننگی یہ دنیا میرے آگے

शायर: Chandrabhan Khayal6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हो गई नंगी ये दुनिया मेरे आगे
इक तमाशा है अनोखा मेरे आगे

रक़्स-ए-तूफ़ान-ए-हवादिस है कि जैसे
नाचता हो कोई बच्चा मेरे आगे

अब नहीं कुछ फ़र्क़ पड़ता तिश्नगी को
इक समंदर हो कि सहरा मेरे आगे

हर ज़माने को दिए मल्बूस जिस ने
वो बरहना है सरापा मेरे आगे

बन रहे हैं कुछ बहाने बेबसी के
मिट न जाए मेरी दुनिया मेरे आगे

मेरे पीछे 'इल्म का सूरज है फिर भी
छा रहा है क्यों अंधेरा मेरे आगे