उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sochon ki palki mein biTha kar sutur ko

सोचों की पालकी में बिठा कर सुतूर को

سوچوں کی پالکی میں بٹھا کر سطور کو

शायर: Lucky farooqi Hasrat5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सोचों की पालकी में बिठा कर सुतूर को
काग़ज़ पे खींच लाया हूँ जन्नत की हूर को

सर पर चढ़ा के रखता हूँ मस्ती के जाम से
इक साँवले बदन के गुलाबी सुरूर को

इक चीख़ माजरे की हक़ीक़त बता गई
ग़ोता लगा के आना था कीचड़ में नूर को

मिलती हैं सुब्ह-ओ-शाम तशद्दुद की रोटियाँ
ग़ुर्बत की तंग जेल में भूके ग़ुरूर को

ऐसे ग़ज़ल के चेहरे पे रौनक़ न आएगी
लफ़्ज़ों के रेग-माल से घिसिए शु'ऊर को