उर्दू शायरी · ग़ज़ल

so gae thak ke KHwab sine par

सो गए थक के ख़्वाब सीने पर

سو گئے تھک کے خواب سینے پر

शायर: Mahboob Mashmiri7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सो गए थक के ख़्वाब सीने पर
ऊँघती है किताब सीने पर

धड़कनों को चलन सिखा दीजे
हाथ रख दें जनाब सीने पर

तेज़ी आती है दिल के दरिया में
टूटता है हुबाब सीने पर

गले लग कर वो रो रही है आँख
गिर रही है शराब सीने पर

रोज़ पीटा है उस की यादों को
रोज़ उतरे अज़ाब सीने पर

ऐसी ढलवानों पर ज़रा मोहतात
रास्ता है ख़राब सीने पर

ख़ार चुभने लगे हैं साँसों में
खिल रहे हैं गुलाब सीने पर