उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sirf jazbaat hi mein baha mat karo

सिर्फ़ जज़्बात ही में बहा मत करो

صرف جذبات ہی میں بہا مت کرو

शायर: Parvez Muzaffar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सिर्फ़ जज़्बात ही में बहा मत करो
कौन कहता है दिल का कहा मत करो

तुम को पत्थर से डरना पड़ेगा मियाँ
वर्ना शीशे के घर में रहा मत करो

आसमाँ सर पे है पाँव धरती पे हैं
ऐसे अंदर ही अंदर ढहा मत करो

हाथ ज़ालिम के मज़बूत हो जाएँगे
ज़ुल्म ख़ामोश रह कर सहा मत करो

पार्क में जा-ब-जा बोर्ड आवेज़ाँ हैं
ऐ परिंदो यहाँ चहचहा मत करो