उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jab dekha hamein haal-e-pareshan mein dekha

जब देखा हमें हाल-ए-परेशान में देखा

جب دیکھا ہمیں حال پریشان میں دیکھا

शायर: Parvez Muzaffar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जब देखा हमें हाल-ए-परेशान में देखा
क्या तुम ने कभी अपने गरेबान में देखा

इंसान में देखी है फ़रिश्ते की सिफ़त है
फिर हम ने दरिंदा उसी इंसान में देखा

इंग्लैण्ड में जिस तरह की परियाँ नज़र आईं
मंज़र कभी ऐसा न परिस्तान में देखा

आ'माल तो आ'माल हैं निय्यत का असर भी
अल्लाह के इंसाफ़ में मीज़ान में देखा

पल भर के लिए शाख़ों पे लहराए थे 'परवेज़'
फिर हम ने उन्हें फूलों को गुलदान में देखा