उर्दू शायरी · ग़ज़ल

chaman mein kahan tak hua kijiye

चमन में कहाँ तक हुआ कीजिए

چمن میں کہاں تک ہوا کیجیے

शायर: Parvez Muzaffar6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

चमन में कहाँ तक हुआ कीजिए
शगूफ़ों के हक़ में दु'आ कीजिए

बयाबाँ ने इक दिन बिगड़ कर कहा
कभी आपने घर भी रहा कीजिए

कोई याद आया तो आता गया
मज़े से मियाँ रत-जगा कीजिए

उतर जाएगा आइने से ग़ुबार
कभी अपने ऊपर हँसा कीजिए

ज़रूरी नहीं है गले भी मिलें
मगर दोस्तों से मिला कीजिए

सताती है 'परवेज़' दुनिया हमें
ग़ज़ल भी न कहिये तो क्या कीजिए