उर्दू शायरी · ग़ज़ल

shua-e-mehr ki shabnam se ban nahin sakti

शुआ-ए-मेहर की शबनम से बन नहीं सकती

شعاع مہر کی شبنم سے بن نہیں سکتی

शायर: Taj Bhopali4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

शुआ-ए-मेहर की शबनम से बन नहीं सकती
ग़म-ए-जहाँ की तिरे ग़म से बन नहीं सकती

ये फ़ैसला है हमारा तिरे लिए सय्याद
चमन में रह के तिरी हम से बन नहीं सकती

हयात-ए-जहद-ओ-अमल से है वर्ना मौत अच्छी
हयात-ए-गिर्या-ए-मातम से बन नहीं सकती

हज़ार कुछ हो मगर ज़ाहिदों की जन्नत में
ये तज्रबा है कि आदम से बन नहीं सकती