उर्दू शायरी · ग़ज़ल

shola hai phul-phul chaman tak na aaiyo

शो'ला है फूल-फूल चमन तक न आइयो

شعلہ ہے پھول پھول چمن تک نہ آئیو

शायर: Kailash Mahir6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

शो'ला है फूल-फूल चमन तक न आइयो
शादाबी-ए-बहार से धोका न खाइयो

मुद्दत हुई वो कू-ए-मलामत उजड़ गया
अब के बरस चराग़-ए-वफ़ा मत जलाइयो

दामन से हम ने गर्द-ए-त'अल्लुक़ भी झाड़ दी
आसूदगान-ए-हिज्र के अब मुँह न आइयो

इन मुस्कुराहटों में दबी है ग़मों की आँच
चेहरे के रूप रंग से धोका न खाइयो

इतने बुरे तो जी के नहीं ज़ूद-रंज लोग
आशुफ़्तगान-ए-शौक़ पे तोहमत न लाइयो

पत्थर न डाल दे कोई झोली में दिन ढले
'माहिर' फ़क़ीर बन के सदा मत लगाइयो