उर्दू शायरी · ग़ज़ल

shiddat bala ki hoti hai jis waqt pyas mein

शिद्दत बला की होती है जिस वक़्त प्यास में

شدت بلا کی ہوتی ہے جس وقت پیاس میں

शायर: Chand Kakralvi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

शिद्दत बला की होती है जिस वक़्त प्यास में
दरिया दिखाई देता है ख़ाली गिलास में

वो चीज़ ढूँडने से भी मिलती है फिर कहाँ
जो चीज़ खोई जाती है होश-ओ-हवास में

उन रास्तों से हम को गुज़ारा फ़रेब ने
काँटे छुपे हुए थे जहाँ नर्म घास में

बेकार कर रहे हैं शिकायत नसीब से
रेशम के कीड़े पालने वाले कपास में

हम ने क़लम की नोक चला कर दिमाग़ पर
टाँके हैं बेल बूटे ग़ज़ल के लिबास में

ऐ 'चाँद' मेरी सम्त अभी अपना रुख़ न कर
इस वक़्त कोई और है मेरे क़यास में