उर्दू शायरी · ग़ज़ल

shauq ki nigahon ka aaj imtihan kar len

शौक़ की निगाहों का आज इम्तिहाँ कर लें

شوق کی نگاہوں کا آج امتحاں کر لیں

शायर: Habeeb Ahmad Siddiqui9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

शौक़ की निगाहों का आज इम्तिहाँ कर लें
बे-नियाज़ नज़रों को दिल का राज़दाँ कर लें

जिस के वास्ते बरसों सई-ए-राएगाँ की है
अब उसे भुलाने की सई-ए-राएगाँ कर लें

राज़दारी-ए-उल्फ़त ता-ब-कै करे कोई
सरगिराँ है वो यूँ भी और सरगिराँ कर लें

आप के लिए कोई दीन-ओ-दिल लुटा बैठा
इक निगाह-ए-ख़ंदाँ का आप भी ज़ियाँ कर लें

आप से उसे निस्बत आप से त'अल्लुक़ क्या
आईये ज़रा हम भी ज़िक्र-ए-आसमाँ कर लें

एक मुश्त-ए-ख़स पर ये नूर-ए-हुस्न की बारिश
फिर किसी तरह ता'मीर अपना आशियाँ कर लें

जिस क़दर मिले कम है दर्द-ए-इश्क़ की दौलत
हर हिकायत-ए-ग़म को अपनी दास्ताँ कर लें

ख़ुश-गुमानियाँ उन की वज्ह-ए-बे-नियाज़ी हैं
रुख़्सत ऐ वफ़ा-केशी कुछ तो बद-गुमानियाँ कर लें

हैरत-ए-नज़ारा है पासबान-ए-चश्म-ओ-दिल
आप हर करिश्मा को सर्फ़-ए-इम्तिहाँ कर लें