उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sharmindagi mein umr basar kar rahe hain hum

शर्मिंदगी में 'उम्र बसर कर रहे हैं हम

شرمندگی میں عمر بسر کر رہے ہیں ہم

शायर: Ibrahim Ali Zeeshan5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

शर्मिंदगी में 'उम्र बसर कर रहे हैं हम
ये काम था तुम्हारा मगर कर रहे हैं हम

पीना करो न बंद मुलाक़ात की शराब
मुद्दत के बा'द तुम पे असर कर रहे हैं हम

ऐसे भटक रहे हैं तुम्हारी तलाश में
दुनिया को लग रहा है सफ़र कर रहे हैं हम

दिल सारी बात भूल गया सोचना भी मत
हँस हँस के तुझ से बात अगर कर रहे हैं हम

तू शहर में नहीं है मगर इस के बावजूद
तेरी गली से रोज़ गुज़र कर रहे हैं हम