उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sham ka intizar karta hun

शाम का इंतिज़ार करता हूँ

شام کا انتظار کرتا ہوں

शायर: Om Bhutkar Maghloob7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

शाम का इंतिज़ार करता हूँ
मैं अँधेरे से प्यार करता हूँ

मेरी मनहूस बात मत टालो
ग़ाफ़िलो होशियार करता हूँ

रो के दम ले के फिर से रो देना
बस यही बार बार करता हूँ

रात भर हँस के रात तक रोऊँ
जो करूँ बे-शुमार करता हूँ

तेरे दिल को क़रार है कब से
आ इधर बे-क़रार करता हूँ

बेवफ़ाई को रक्खो एक तरफ़
इश्क़ मैं शानदार करता हूँ

ये जो 'मग़्लूब' तेरा घर है ना
आज इस को मज़ार करता हूँ