उर्दू शायरी · ग़ज़ल

chahe jina bhaari hai

चाहे जीना भारी है

چاہے جینا بھاری ہے

शायर: Om Bhutkar Maghloob7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

चाहे जीना भारी है
मरना इक ग़द्दारी है

आग लगा दे दुनिया को
दिल में गर चिंगारी है

तेरी शोहरत हफ़्ता भर
मेरी लम्बी पारी है

कोना तन्हाई अंधेर
अपनी गहरी यारी है

तेरे नाम की अब घर में
इक ख़ाली अलमारी है

मरघट के ऐ बूढे पेड़
क्या तू मेरी सवारी है

हाल मिरा पूछा तू कह
एक क़यामत जारी है