उर्दू शायरी · ग़ज़ल

gar mujhe sada-dil banaya tha

गर मुझे सादा-दिल बनाया था

گر مجھے سادہ دل بنایا تھا

शायर: Om Bhutkar Maghloob7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

गर मुझे सादा-दिल बनाया था
तो भला क्यों जहाँ में लाया था

वाजिब-उल-क़त्ल मानिए उस को
जिस ने लफ़्ज-ए-वफ़ा बनाया था

साथ ग़म भी तो छोड़ देता है
बे-सबब दिल जिगर जलाया था

शे'र ये भूप में क्यों गाने लगे
मैं ने तो भैरवी बताया था

कल मिरे घर में मेरा क़त्ल हुआ
ख़ुश बहुत हूँ कोई तो आया था

आख़िरी दिन ख़ुदा ये कहने लगे
किस ने तुम को यहाँ बुलाया था

अब मिरी माँ है बस जो पूछती है
किस ने 'मग़्लूब' को सताया था