उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aaj suKHan ki sham karenge

आज सुख़न की शाम करेंगे

آج سخن کی شام کریں گے

शायर: Om Bhutkar Maghloob9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आज सुख़न की शाम करेंगे
अपने ग़म नीलाम करेंगे

बदनामी ही इक ज़रीया है
वर्ना हम क्या नाम करेंगे

काम हमें आराम का देना
वर्ना फिर आराम करेंगे

तुम ही सोचो हम जैसे क्या
ऐसे वैसे काम करेंगे

चुस्त रहेगी अपनी सुस्ती
क़ब्र में भी आराम करेंगे

देखो ज़िंदा रहने वाले
दिल दुख का गोदाम करेंगे

लोग तो जीने या मरने की
हर कोशिश नाकाम करेंगे

हम मरने से पहले दुख की
दौलत तेरे नाम करेंगे

फ़नकारों को तो 'आदत है
जो कुछ ख़ास है 'आम करेंगे