उर्दू शायरी · ग़ज़ल

be-qarari ko be-qarari hai

बे-क़रारी को बे-क़रारी है

بے قراری کو بے قراری ہے

शायर: Om Bhutkar Maghloob6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बे-क़रारी को बे-क़रारी है
किस के घर जाऊँ किस की बारी है

सारी दुनिया का दिल दुखाने की
जान-ए-मन तेरी ज़िम्मेदारी है

दिल फिर अपना उन्हीं को दे बैठे
मौत का इंतिज़ाम जारी है

हुक्म होते ही मैं उछलता हूँ
सारी दुनिया मिरी मदारी है

मैं किसी को नज़र नहीं आता
किस ने मेरी नज़र उतारी है

चीख़ जो नईं अभी सुनाई दी
सुन लो 'मग़्लूब' वो तुम्हारी है