उर्दू शायरी · ग़ज़ल

shairi dil ki jo aawaz nahin hoti hai

शा'इरी दिल की जो आवाज़ नहीं होती है

شاعری دل کی جو آواز نہیں ہوتی ہے

शायर: Saba Akbarabadi10 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

शा'इरी दिल की जो आवाज़ नहीं होती है
साहिरी होती है ए'जाज़ नहीं होती है

बे-हिसी ज़मज़मा-पर्दाज़ नहीं होती है
किसी मिज़राब में आवाज़ नहीं होती है

आ गई ज़िंदगी अंजाम-ए-मोहब्बत के क़रीब
महव वो लज़्ज़त-ए-आग़ाज़ नहीं होती है

बारहा बाब-ए-क़फ़स खोल चुका है सय्याद
ख़ुद हमें हिम्मत-ए-परवाज़ नहीं होती है

निगह-ए-दोस्त बना देगी फ़साना दिल को
ये हक़ीक़त नज़र-अंदाज़ नहीं होती है

ज़ीस्त की चाल से कौनैन का दिल हिलता है
मौत के पाओं की आवाज़ नहीं होती है

फैल कर सोज़-ए-मोहब्बत की ख़बर कर देगी
रौशनी शम' की हमराज़ नहीं होती है

क्या ख़बर 'इश्क़ में क्यों नासेह-ए-मुश्फ़िक़ की सलाह
मेरे दिल पर असर-अंदाज़ नहीं होती है

अब है किस शग़्ल में ऐ दिल को मिटाने वाले
अब तो मश्क़-ए-निगह-ए-नाज़ नहीं होती है

मैं असीर-ए-निगह-ए-नाज़ किसी का हूँ 'सबा'
मेरी ज़ंजीर में आवाज़ नहीं होती है