उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aao kuchh baaten karen ji khol kar

आओ कुछ बातें करें जी खोल कर

آؤ کچھ باتیں کریں جی کھول کر

शायर: Saba Akbarabadi10 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आओ कुछ बातें करें जी खोल कर
वक़्त कट जाए ज़रा हँस बोल कर

ज़ीस्त को रौशन किया जी खोल कर
पी लिया साग़र में सूरज घोल कर

क़ैद में परवाज़ की ताक़त न थी
पर-शिकस्ता रह गए पर तोल कर

तल्ख़ कर दी तुम ने दिल की ज़िंदगी
चंद मीठे बोल मुँह से बोल कर

ऐ ख़रीदार-ए-गुहर-हा-ए-फ़ुज़ूल
कुछ हमारे आँसुओं का मोल कर

कूचा-गर्दान-ए-तमन्ना को भी देख
जल्वा-गाह-ए-नाज़ का दर खोल कर

फेंकता हूँ दिल के टुकड़े ख़ाक पर
जिस का दिल चाहे उठा ले रोल कर

अब ज़बान-ए-दार के जौहर खुले
हम तो मुजरिम हो गए लब खोल कर

ठोकरें खा कर ये आता है ख़याल
हम भी चल सकते थे आँखें खोल कर

उफ़ 'सबा' अर्ज़ानी-ए-जिंस-ए-हुनर
बेचते हैं अब अदब को तोल कर