उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sarab-e-sahra mein pani talash karta hai

सराब-ए-सहरा में पानी तलाश करता है

سراب صحرا میں پانی تلاش کرتا ہے

शायर: Chand Akbarabadi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सराब-ए-सहरा में पानी तलाश करता है
वो दलदलों में रवानी तलाश करता है

हर एक ज़र्रे से पहचान रब की होती है
वो फिर भी उस की निशानी तलाश करता है

उसे यक़ीन है अपने ख़ुदा की रहमत पर
जो तपते सहरा में पानी तलाश करता है

किताब-ए-दिल को समझना मुहाल है उस का
वो चेहरा चेहरा म'आनी तलाश करता है

नए ग़मों के अँधेरों से जंग है उस की
बुझे दियों की जवानी तलाश करता है

हों राजा रानी हों लश्कर हों हाथी घोड़े सब
वो हर कहानी में नानी तलाश करता है

बहुत शरीफ़ है तो 'चाँद' जा के संसद में
'कबीर-दास' की वाणी तलाश करता है