उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jo thi ilaqe mein sab se hasin bech aae

जो थी इलाक़े में सब से हसीन बेच आए

جو تھی علاقے میں سب سے حسین بیچ آئے

शायर: Chand Akbarabadi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जो थी इलाक़े में सब से हसीन बेच आए
हम अपने पुरखों की सारी ज़मीन बेच आए

पुराने लोगों ने गंजों को कंघियाँ बेचीं
नए जो लोग हैं साँपों को बीन बेच आए

भरम था दिल में जो महफ़िल का वो भी दिल से गया
सुख़न तो बिकता था तुम सामईन बेच आए

नहीं ये ग़म कि अमानत में क्यूँ ख़यानत की
मुझे ये दुख है वो अपना यक़ीन बीच आए

जो लोग खाते हैं उर्दू के नाम की रोटी
लबों पे उन के है बस सीन शीन बेच आए

पकड़ ली ज़ंग में लिपटी होई नई तहज़ीब
मिला था हम को जो सोने सा दीन बेच आए