उर्दू शायरी · ग़ज़ल

barf mein KHud ko badal kar dekhna

बर्फ़ में ख़ुद को बदल कर देखना

برف میں خود کو بدل کر دیکھنا

शायर: Chand Akbarabadi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बर्फ़ में ख़ुद को बदल कर देखना
फिर किसी सूरज पे चल कर देखना

फेंक दो सर से ये चादर साए की
धूप फिर चेहरे पे मल कर देखना

दर्द फूलों का समझने के लिए
काँटे हाथों से मसल कर देखना

क़द हमारे साए का भी है बड़ा
धूप से अपनी निकल कर देखना

जंग कर लेना सभी अस्बाब से
अपने रब से फिर मचल कर देखना

अहमियत क्या है तिरे किरदार की
ख़ुद कहानी से निकल कर देखना

'चाँद' का मुश्किल सफ़र कैसे लिखूँ
आप ख़ुद पैरों पे चल कर देखना