उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jawab chiKH uThe hain sawal chiKH uThe

जवाब चीख़ उठे हैं सवाल चीख़ उठे

جواب چیخ اٹھے ہیں سوال چیخ اٹھے

शायर: Chand Akbarabadi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जवाब चीख़ उठे हैं सवाल चीख़ उठे
कहीं पे लफ़्ज़ कहीं पर ख़याल चीख़ उठे

दिखा ये ख़्वाब कि कल रात मर गया हूँ मैं
गुनाह जितने थे सब हस्ब-ए-हाल चीख़ उठे

कहीं इमाम कहीं मुक़तदी मिले जाहिल
अज़ानें सुन के हमारी बिलाल चीख़ उठे

फिसल गई मिरी मुट्ठी से ज़िंदगी की रेत
घड़ी से हारे जो लम्हे तो साल चीख़ उठे

बना के अपनी ही तस्वीर ख़ुद पशेमाँ हूँ
जो रंग मैं ने भरे सब्ज़ लाल चीख़ उठे