उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sarab dekhne ko intizar karne ko

सराब देखने को इंतिज़ार करने को

سراب دیکھنے کو انتظار کرنے کو

शायर: Zafar Iqbal7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सराब देखने को इंतिज़ार करने को
करो तो काम पड़े हैं हज़ार करने को

दिखाई देती नहीं शक्ल अब वसूली की
कि उस से कर तो लिया है उधार करने को

वो रूठता रहे और हम उसे मनाया करें
कहा था किस ने ये तक़सीम-ए-कार करने को

ख़ुद उस के दिल से उठेगी सदा तसल्ली की
बहुत कहो न उसे ए'तिबार करने को

कलीद-ए-बोसा कहीं वो भी रख के भूल गया
यहाँ भी दिल नहीं मिलता निसार करने को

गुनाहगार तो पहले करो हमें इक बार
हो बे-क़रार बहुत संगसार करने को

बिसात-ए-शौक़ ही उस ने लपेट दी है 'ज़फ़र'
उदास हो जिसे लिपटा के प्यार करने को