उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sar-mast-e-sharab-e-shauq hai dil

सर-मस्त-ए-शराब-ए-शौक़ है दिल

سر مست شراب شوق ہے دل

शायर: Jaleel Qidwai11 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सर-मस्त-ए-शराब-ए-शौक़ है दिल
या ख़ुद हमा-तन है जाम-ए-मय दिल

बुझती ही नहीं है प्यास इस की
इतना भी न हो ख़राब-ए-मय दिल

हुस्न-ए-रुख़-ए-यार से अयाँ है
सब तेरा जमाल-ए-शौक़ ऐ दिल

जिस को न तिरी तलब हो प्यारे
ऐसा भी जहाँ में कोई है दिल

क्या ऐसी पड़ी है इस पे उफ़्ताद
बेज़ार जो ज़िंदगी से है दिल

किसी के ग़म-ए-हिज्र में शब-ओ-रोज़
सर-गश्ता-ओ-बे-क़रार है दिल

किस साक़ी-ए-माह-वश से छुट कर
है जस्त में मिस्ल-ए-मौज-ए-मय दिल

किस मुतरिब-ए-ख़ुश-नवा के ग़म में
फ़रियाद-कुनाँ है मिस्ल-ए-नै दिल

इक हाल पे मिस्ल-ए-तब्अ'-ए-जानाँ
तुझ को भी नहीं क़रार ऐ दिल

अब वस्ल में हिज्र की हवस है
है तू भी ग़रज़ अजीब शय दिल

है तेरे सिवा 'जलील' का कौन
ऐ यार-ए-वफ़ा-शिआ'र ऐ दिल