उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sar kaT ke kar dijiye qatil ke hawale

सर काट के कर दीजिए क़ातिल के हवाले

سر کاٹ کے کر دیجئے قاتل کے حوالے

शायर: Haidar Ali Aatish6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सर काट के कर दीजिए क़ातिल के हवाले
हिम्मत मिरी कहती है कि एहसान-ए-बला ले

हर क़तरा-ए-ख़ूँ सोज़-ए-दरूँ से है इक अख़गर
जल्लाद की तलवार में पड़ जाएँगे छाले

नादान न हो अक़्ल अता की है ख़ुदा ने
यूसुफ़ की तरह तुम को कोई बेच न डाले

हस्ती की असीरी से शरर से हैं सिवा तंग
छूटे तो इधर फिर के नहीं देखने वाले

सालिक को यही जादे से आवाज़ है आती
पामाल जो हो राह वो मंज़िल की निकाले

सय्याद चमन ही में करे मुर्ग़-ए-चमन ज़ब्ह
लबरेज़ लहू से ही दरख़्तों के हों थाले