उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sar-e-firaq bhi tark-e-ana nahin hoti

सर-ए-फ़िराक़ भी तर्क-ए-अना नहीं होती

سر فراق بھی ترک انا نہیں ہوتی

शायर: Balmohan panday4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सर-ए-फ़िराक़ भी तर्क-ए-अना नहीं होती
कि टूट जाती है दीवार वा नहीं होती

मेरे अलावा उसे ख़ुद से भी मोहब्बत है
और ऐसा करने से वो बेवफ़ा नहीं होती

जब अपने लोग मिरे तब हमें समझ आया
कि मौत सारे दुखों की दवा नहीं होती

ज़ियादा सोचने से बचना चाहिए 'मोहन'
ख़याली ज़ख़्मों की कोई दवा नहीं होती