उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sanware aaKHirat ya zindagi ko

सँवारे आख़िरत या ज़िंदगी को

سنوارے آخرت یا زندگی کو

शायर: Parveen Fana Syed5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सँवारे आख़िरत या ज़िंदगी को
कहाँ इतनी भी मोहलत आदमी को

बुझाई आँसुओं ने आतिश-ए-ग़म
मगर भड़का दिया है बेकली को

भरम खुल जाएगा दानाइयों का
पुकारो तो ज़रा दीवानगी को

जो सर झुकता नहीं है दिल तो झुक जाए
फ़क़त इतनी तलब है बंदगी को

जो दिल से फूट कर आँखों में चमके
तरसते रह गए हम इस हँसी को