उर्दू शायरी · ग़ज़ल

saKHt garmi mein bhi sardi lag rahi

सख़्त गर्मी में भी सर्दी लग रही

سخت گرمی میں بھی سردی لگ رہی

शायर: Aadarsh Dubey5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सख़्त गर्मी में भी सर्दी लग रही
अब तबीअ'त इतनी अच्छी लग रही

रात की चुनरी पे तारे लग चुके
शाम के सूरज को हल्दी लग रही

खिल गए ख़्वाबों के मंज़र हर तरफ़
नींद में वो और अच्छी लग रही

मौसमों के रंग उड़ते जा रहे
और वो फूलों में तितली लग रही

झूट है ये रौशनी दीवार पर
बस तिरी तस्वीर सच्ची लग रही