उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sail-e-ashk-e-hazin bhi kuchh hai

सैल-ए-अश्क-ए-हज़ीं भी कुछ है

سیل اشک حزیں بھی کچھ ہے

शायर: Lucky farooqi Hasrat6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सैल-ए-अश्क-ए-हज़ीं भी कुछ है
पर मिरी आस्तीन भी कुछ है

ऐ पुराने ख़याल की लड़की
तुझ में ताज़ा-तरीन भी कुछ है

'मीर' के दर पे रेंगने वालो
इस ग़ज़ल की ज़मीन भी कुछ है

साक़िया पढ़ रहा है बिस्मिल्लाह
इस का मतलब है दीन भी कुछ है

तेरी आँखों को देख कर जाना
शाइ'री से हसीन भी कुछ है

जो उगलते हैं ज़हर ऐ 'हसरत'
उन से कह दो की बीन भी कुछ है