उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sach hai teri hi aarzu mujhko

सच है तेरी ही आरज़ू मुझ को

سچ ہے تیری ہی آرزو مجھ کو

शायर: Dagh Dehlvi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सच है तेरी ही आरज़ू मुझ को
कहीं जीने दे यूँही तू मुझ को

बंदा-ए-नौ-ख़रीद हूँ हर दम
रखिए आँखों के रू-ब-रू मुझ को

कल तक उस की तलाश थी लेकिन
आज है अपनी जुस्तुजू मुझ को

पहले वो था कि तुम न थे आगाह
अब वो हूँ सुन लो कू-ब-कू मुझ को

वाँ शिकायत पे वो हिकायत है
कि नहीं जा-ए-गुफ़्तुगू मुझ को

ऐ हयात-ए-दो-रोज़ा ले आई
किन गिरफ़्तारियों में तू मुझ को

'दाग़' यकसू हो ख़ुश नहीं आती
ना-उमीदाना आरज़ू मुझ को