उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sabz-ruton mein rang-e-KHizani paDhte hain

सब्ज़-रुतों में रंग-ए-ख़िज़ानी पढ़ते हैं

سبز رتوں میں رنگ خزانی پڑھتے ہیں

शायर: P P Srivastava Rind6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सब्ज़-रुतों में रंग-ए-ख़िज़ानी पढ़ते हैं
हर चेहरे पर एक कहानी पढ़ते हैं

नाम नहीं है कोई भी दरवाज़े पर
तख़्ती पर बस एक निशानी पढ़ते हैं

तिश्ना-लब लहरों ने क्या क्या लिख डाला
ख़ुश्क रेत पर पानी पानी पढ़ते हैं

नया सबक़ तो याद नहीं होता हम को
जब पढ़ते हैं बात पुरानी पढ़ते हैं

जब कोई मानूस सी ख़ुशबू आती है
लम्स में उस के रात की रानी पढ़ते हैं

फ़ुर्सत के लम्हों में हम अक्सर ऐ 'रिंद'
तहरीरें जानी पहचानी पढ़ते हैं