उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sab se yahi kahta hun ki han hai meri jagir

सब से यही कहता हूँ कि हाँ है मिरी जागीर

سب سے یہی کہتا ہوں کہ ہاں ہے مری جاگیر

शायर: Yawar Azeem8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सब से यही कहता हूँ कि हाँ है मिरी जागीर
ये शौकत-ए-अल्फ़ाज़-ओ-बयाँ है मिरी जागीर

ये 'उम्र ही ऐसी है मिरे ख़्वाब बड़े हैं
ख़ुद मेरे लिए बार-ए-गराँ है मिरी जागीर

डरता हूँ किसी मोड़ पे छिन जाए न मुझ से
बचपन से जो एहसास-ए-ज़ियाँ है मिरी जागीर

बुझती हुई शामों के असासे हैं मिरे पास
अफ़्सुर्दा चराग़ों का धुआँ है मिरी जागीर

मैं तेरी इजाज़त से ये साबित भी करूँगा
ऐ दोस्त तिरा जिस्म-ए-जवाँ है मिरी जागीर

समझाते ही गुज़री है दिल-ए-नफ़'-तलब को
ला-हासिली-ए-'उम्र-ए-रवाँ है मिरी जागीर

तुम दिल की तरफ़ से न यहाँ नक़्ब लगाओ
ये आँख ये ख़्वाबों की दुकाँ है मिरी जागीर

क्या क्या मिरी सोचों के हरे पेड़ थे 'यावर'
अब नज़्र-ए-सितम-हा-ए-ख़िज़ाँ है मिरी जागीर