उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sab se juda aur sab se alag meri teri aawaz

सब से जुदा और सब से अलग मेरी तेरी आवाज़

سب سے جدا اور سب سے الگ میری تیری آواز

शायर: Parwez Rahmani5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सब से जुदा और सब से अलग मेरी तेरी आवाज़
तू पुर-शोर समुंदर में सूखी जलती आवाज़

कोई भूला भटका बादल कह बैठे लब्बैक
आख़िर कब तक ख़ाली जाए मिट्टी की आवाज़

आधे रस्ते ही में सूरज कर देता है ख़ाक
जब भी कभी आकाश को देती है धरती आवाज़

ज़ेहनों में जब सन्नाटों का बरपा हो कोहराम
फिर कैसे सुन पाए कोई कान पड़ी आवाज़

दिल के मंज़र-गाह में 'रहमानी' ख़्वाहिश बे-रंग
गुम्बद सी क़िस्मत में जूँ गूँगी बहरी आवाज़