उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aahaTen taza muqaddar ki taraf

आहटें ताज़ा मुक़द्दर की तरफ़

آہٹیں تازہ مقدر کی طرف

शायर: Parwez Rahmani7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आहटें ताज़ा मुक़द्दर की तरफ़
आइनों के ध्यान पत्थर की तरफ़

वसवसे सीना-सिपर मौजूद से
वाहिमे की पुश्त ख़ंजर की तरफ़

शीशा शीशा ख़ौफ़ हर चेहरे पे नक़्श
इक निशाना सैकड़ों सर की तरफ़

हाल पर दुश्मन की पोशीदा-रुख़ी
आइना रौशन सिकंदर की तरफ़

मुस्कुरा कर आबला-तन बढ़ गए
ख़ार के सुरख़ाब बिस्तर की तरफ़

रौशनी बाहर बड़ी तेज़ाब है
क़तरा क़तरा आँख मंज़र की तरफ़

सरवरी थी नोक-ए-पा-ए-ख़ाकसार
जा पड़ी दस्तार-ए-ख़ुद-सर की तरफ़