उर्दू शायरी · ग़ज़ल

andheron se agar aaina-samani hui hogi

अँधेरों से अगर आईना-सामानी हुई होगी

اندھیروں سے اگر آئینہ سامانی ہوئی ہوگی

शायर: Parwez Rahmani9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अँधेरों से अगर आईना-सामानी हुई होगी
बड़ी मुश्किल से कोई शक्ल नूरानी हुई होगी

चराग़ों के पते मिलते नहीं शब-गाह-ए-हस्ती में
हवा-ए-शाम तुझ से कोई नादानी हुई होगी

नहीं मुझ सा कोई तन्हा ज़माने में हुआ होगा
न आबादे में इस सूरत बयाबानी हुई होगी

नज़र के सामने फैला हुआ दश्ताब सा क्या है
यक़ीनन आब-ज़ारों में शतरबानी हुई होगी

परों पर आसमानी वसवसे लिपटे रहे होंगे
परिंदों से तभी पर्वाज़ गर्दानी हुई होगी

फिर अपना हिस्सा लेने आज ख़ुद्दारी नहीं आई
ज़मीं-दारों से बटवारे में मन-मानी हुई होगी

शिकार-ए-शे'र-शोर-अंगेज़ उन के हाथ आ जाए
इसी ज़िद में हरीफ़ों से ग़ज़ल-रानी हुई होगी

यूँ बर्फ़ानी हवाओं से उक़ाब उलझे अगर होंगे
तो शिरयानों में बहती आग भी पानी हुई होगी

निकाले होंगे जब अफ़्कार ने शे'रों में गुल-बूटे
तभी कोई ग़ज़ल 'परवेज़' रहमानी हुई होगी