उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sab kuchh karobari hai

सब कुछ कारोबारी है

سب کچھ کاروباری ہے

शायर: Ejaz Ansari7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सब कुछ कारोबारी है
लहजा तक बाज़ारी है

चेहरों पर चेहरों का बोझ
कैसी दुनिया-दारी है

कहते हैं आसान है सब
करने में दुश्वारी है

रिश्ते-नाते रस्म-ओ-रिवाज
दीन से दुनिया भारी है

हम हैं दूर सियासत से
हम को इज़्ज़त प्यारी है

उस को पा कर ख़ुद खो जाऊँ
कैसी ये बीमारी है

है मशहूर भी रुस्वा भी
वो 'एजाज़' अंसारी है