उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sab ko KHilaf mat kar

सब को ख़िलाफ़ मत कर

سب کو خلاف مت کر

शायर: Parwez Rahmani8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सब को ख़िलाफ़ मत कर
आईना साफ़ मत कर

क़द यूँ बड़ा न होगा
लाफ़-ओ-ग़ज़ाफ मत कर

रहने दे जो है जैसा
कोई ख़िलाफ़ मत कर

जो कह रहा है सुन ले
बस ए'तिराफ़ मत कर

जब जानता नहीं कुछ
तो इख़्तिलाफ़ मत कर

सच्चाई सामने है
अब इंहिराफ़ मत कर

सब हो चुका है साबित
अब लाम क़ाफ़ मत कर

मत बोझ ज़ेहन पर रख
दिल के ख़िलाफ़ मत कर