उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sab hain so main bhi is safar mein hun

सब हैं सो मैं भी इस सफ़र में हूँ

سب ہیں سو میں بھی اس سفر میں ہوں

शायर: Om Prabhakar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सब हैं सो मैं भी इस सफ़र में हूँ
दिन में गर्दिश में रात घर में हूँ

गो कि देखा नहीं वो दहशत-गर्द
शाम को ख़ौफ़ शब ख़तर में हूँ

कर नहीं पाता कोई अच्छा काम
जाने किस की बुरी नज़र में हूँ

मुँह से सच बात कम निकलती है
किसी आसेब के असर में हूँ

धीरे-धीरे धसक रहा हूँ मैं
थोड़ा दीवार थोड़ा दर में हूँ