उर्दू शायरी · ग़ज़ल

saz rota hai chiKH gati hai

साज़ रोता है चीख़ गाती है

ساز روتا ہے چیخ گاتی ہے

शायर: Lucky farooqi Hasrat8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

साज़ रोता है चीख़ गाती है
मेरा नग़्मा तसव्वुराती है

एक अंधे से ग़ुस्ल-ख़ाने में
चाँदनी धूप से नहाती है

सुन के ता'बीर के ख़राटों को
ख़्वाब की नींद टूट जाती है

हिज्र को गोद में लिटा कर शब
वस्ल की लोरियाँ सुनाती है

मेरा लहजा है मिस्ल-ए-सौदाई
और अंदाज़ नफ़सियाती है

सीढ़ियाँ चढ़ते चढ़ते जीवन की
साँस की साँस फूल जाती है

वादी-ए-गुल की शाहज़ादी अब
ख़ून के लोथड़े उठाती है

शाइ'री रेत की सलाई से
पानियों में गिरह लगाती है