उर्दू शायरी · ग़ज़ल

saya qadam qadam pe hai har raushni ke sath

साया क़दम क़दम पे है हर रौशनी के साथ

سایہ قدم قدم پہ ہے ہر روشنی کے ساتھ

शायर: JaiKrishn Chaudhry Habeeb10 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

साया क़दम क़दम पे है हर रौशनी के साथ
सुब्हें छुपी हैं पर्दे में हर तीरगी के साथ

आसान कर दी तेरे तसव्वुर ने मंज़िलें
गुज़रे रह-ए-हयात से हम बे-ख़ुदी के साथ

सज्दे दिल-ओ-नज़र के तो हर जा बिखर गए
दैर-ओ-हरम का काम ही क्या बंदगी के साथ

इक दर्द था कि बज़्म से ले कर तेरी चले
दिल याँ कि वाँ लुटा के चले हम ख़ुशी के साथ

तेरी निगाह-ए-नाज़ के क़ुर्बान जाइए
लपका है दिल में शो'ला मगर दिलकशी के साथ

तेरी तलब में दार-ओ-रसन से गुज़र गए
खेला है हम ने खेल कोई ज़िंदगी के साथ

साग़र में अपनी आँखों की मस्ती भी घोल दे
मय भी दो-आतिशाँ हो तिरी दिलबरी के साथ

फ़ित्ने से कम नहीं है बिगड़ना तिरा मगर
निखरा है हुस्न और भी कुछ बरहमी के साथ

अपना बना के यूँ मुझे छोड़ा है राह में
दो-गाम जैसे कोई चले अजनबी के साथ

ऐ शिकवा-संज तेरा ही दामन नहीं वसीअ'
क्या ने'मतें 'हबीब' मिलीं ज़िंदगी के साथ