उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sanp jab aastin se nikla

साँप जब आस्तीन से निकला

سانپ جب آستین سے نکلا

शायर: Yahya Khan Yusuf Zai5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

साँप जब आस्तीन से निकला
वहम कोई यक़ीन से निकला

उस ने जब मुझ से अलविदा'अ कहा
कोई पुर्ज़ा मशीन से निकला

उस से बिछड़ा तो यूँ लगा जैसे
इक मुसलमान दीन से निकला

रौशनी भर गई ख़लाओं में
इक सितारा ज़मीन से निकला

सिदरत-उल-मुंतहा पे जा पहुँचा
अस्फ़ल-ए-साफ़िलीन से निकला