उर्दू शायरी · ग़ज़ल

roz is dil ki sifarish nahin ki ja sakti

रोज़ इस दिल की सिफ़ारिश नहीं की जा सकती

روز اس دل کی سفارش نہیں کی جا سکتی

शायर: Zafar Iqbal7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

रोज़ इस दिल की सिफ़ारिश नहीं की जा सकती
आप से और गुज़ारिश नहीं की जा सकती

आप के ख़्वाब तो हम देखते रहते हैं बहुत
इक ज़रा आप की ख़्वाहिश नहीं की जा सकती

आप को घेर के लाना तो नहीं ना-मुम्किन
मगर इस अब्र से बारिश नहीं की जा सकती

आते जाते तो हैं इस दिल के मकाँ में इतना
कहिए क्या इस में रिहाइश नहीं की जा सकती

ये जो कोशिश है रह-ए-रास्त पे लाने की मुझे
इससे बढ़ कर कोई साज़िश नहीं की जा सकती

ये अदब-गाह-ए-मोहब्बत है सो हम जानते हैं
आप के सामने जुंबिश नहीं की जा सकती

होने वाला ही नहीं काम पड़ा है जो 'ज़फ़र'
ये नहीं है कोई कोशिश नहीं की जा सकती