उर्दू शायरी · ग़ज़ल

riwayaton ke KHudaon mein jang hai kuchh aur

रिवायतों के ख़ुदाओं में जंग है कुछ और

روایتوں کے خداؤں میں جنگ ہے کچھ اور

शायर: P P Srivastava Rind7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

रिवायतों के ख़ुदाओं में जंग है कुछ और
मगर सुनो तो सदा-ए-मलंग है कुछ और

न जाने कौन सा तूफ़ान आने वाला है
सियाह रात के बहने का ढंग है कुछ और

गुलाब-रुत की शफ़क़-मंज़री का क्या कहना
बसंत-रुत का मगर ज़र्द रंग है कुछ और

हमारे हम-सफ़रों की उड़ान मंज़िल तक
मगर हमारे तो दिल में तरंग है कुछ और

रिवायतों की शिकस्ता हुदूद से हट कर
हमारी अहल-ए-ज़माना से जंग है कुछ और

ये माना शाम बिछाएगी सुरमई चादर
सिमटती धूप में लेकिन उमंग है कुछ और

सफ़ेद बालों में मेहंदी रचाए फिरते हो
जनाब-ए-'रिंद' तुम्हारा भी ढंग है कुछ और