उर्दू शायरी · ग़ज़ल

rawish-e-asr se inkar bahut mushkil hai

रविश-ए-अस्र से इंकार बहुत मुश्किल है

روش عصر سے انکار بہت مشکل ہے

शायर: Aarif Akhtar Naqvi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

रविश-ए-अस्र से इंकार बहुत मुश्किल है
कर्ब-ए-एहसास का इज़हार बहुत मुश्किल है

वो ये कहते हैं कि मैं बोलूँ हूँ आवाज़ उन की
उफ़ ये मजबूरी-ए-गुफ़्तार बहुत मुश्किल है

हम से दीवाने कहाँ ताब-ओ-तपिश से ठहरे
ढूँढ लें साया-ए-दीवार बहुत मुश्किल है

मिरा दुश्मन मिरे अंदर ही छुपा है और मैं
ख़ुद से हूँ बर-सर-ए-पैकार बहुत मुश्किल है

आह करने की इजाज़त नहीं इस शहर में अब
और इक ये दिल-ए-बीमार बहुत मुश्किल है