उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aaj bhi yaad-e-yar baqi hai

आज भी याद-ए-यार बाक़ी है

آج بھی یاد یار باقی ہے

शायर: Aarif Akhtar Naqvi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आज भी याद-ए-यार बाक़ी है
इश्क़ का ए'तिबार बाक़ी है

ज़िंदगी की रमक़ है हम में अभी
आप का इंतिज़ार बाक़ी है

यादगार-ए-जुनूँ हमारे पास
दामन-ए-तार-तार बाक़ी है

फिर रहे हैं सलीब उठाए हम
हाँ अभी वस्ल-ए-दार बाक़ी है

ये उमीदें न छीन लें हालात
बस यही इख़्तियार बाक़ी है

लफ़्ज़-ओ-मा'नी की वुस'अतों के साथ
शे'र का इख़्तिसार बाक़ी है

मर्हबा उश्शाक़ान-ए-हक़ तुम से
कुछ उमीद-ए-बहार बाक़ी है